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सहीह मुस्लिम

नंबर 271

नंबर 271किताब 1, नंबर 177अरबी नंबरिंग 93.03
وَحَدَّثَنِي إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، أَخْبَرَنَا مُعَاذٌ، - وَهُوَ ابْنُ هِشَامٍ - قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ بِمِثْلِهِ ‏.‏
The same hadith has been narrated by Ishaq b. Mansur on the authority of Jabir with another chain of transmitters

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।