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सहीह मुस्लिम

नंबर 270

नंबर 270किताब 1, नंबर 176अरबी नंबरिंग 93.02
وَحَدَّثَنِي أَبُو أَيُّوبَ الْغَيْلاَنِيُّ، سُلَيْمَانُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ وَحَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ عَمْرٍو، حَدَّثَنَا قُرَّةُ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، حَدَّثَنَا جَابِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَنْ لَقِيَ اللَّهَ لاَ يُشْرِكُ بِهِ شَيْئًا دَخَلَ الْجَنَّةَ وَمَنْ لَقِيَهُ يُشْرِكُ بِهِ دَخَلَ النَّارِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو أَيُّوبَ قَالَ أَبُو الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ ‏.‏
It is narrated on the authority of Jabir b. Abdullah:I heard the Messenger of Allah (ﷺ) saying: He who met Allah without associating anything with Allah entered Paradise and he who met Him associating (anything) with Him entered Fire

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।