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सहीह मुस्लिम

नंबर 246

नंबर 246किताब 1, नंबर 153अरबी नंबरिंग 82.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى التَّمِيمِيُّ، وَعُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، كِلاَهُمَا عَنْ جَرِيرٍ، قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا جَرِيرٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي سُفْيَانَ، قَالَ سَمِعْتُ جَابِرًا، يَقُولُ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ إِنَّ بَيْنَ الرَّجُلِ وَبَيْنَ الشِّرْكِ وَالْكُفْرِ تَرْكَ الصَّلاَةِ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Jabir that he heard the Apostle (may peace and blessings be upon him) saying. Verily between man and between polytheism and unbelief is the negligence of prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।