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सहीह मुस्लिम

नंबर 245

नंबर 245किताब 1, नंबर 152अरबी नंबरिंग 81.02
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، بِهَذَا الإِسْنَادِ مِثْلَهُ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ فَعَصَيْتُ فَلِيَ النَّارُ ‏"‏ ‏.‏
A'mash narrated this hadith with the same chain of transmitters, with this change of words that he (the Satan) said:I disobeyed and I am doomed to Hell

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।