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सहीह मुस्लिम

नंबर 201

नंबर 201किताब 1, नंबर 108अरबी नंबरिंग 56.03
حَدَّثَنَا سُرَيْجُ بْنُ يُونُسَ، وَيَعْقُوبُ الدَّوْرَقِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ سَيَّارٍ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ جَرِيرٍ، قَالَ بَايَعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم عَلَى السَّمْعِ وَالطَّاعَةِ فَلَقَّنَنِي ‏ "‏ فِيمَا اسْتَطَعْتَ ‏"‏ ‏.‏ وَالنُّصْحِ لِكُلِّ مُسْلِمٍ ‏.‏ قَالَ يَعْقُوبُ فِي رِوَايَتِهِ قَالَ حَدَّثَنَا سَيَّارٌ ‏.‏
It is narrated on the authority of Jarir that he observed:I owed allegiance to the Messenger of Allah (may peace and blessings be upon him) on hearing ( is commands) and obeying (them) and the Prophet) instructed me (to act) as lay in my power, and sincerity and goodwill for every Muslim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।