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सहीह मुस्लिम

नंबर 200

नंबर 200किताब 1, नंबर 107अरबी नंबरिंग 56.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَابْنُ، نُمَيْرٍ قَالُوا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ زِيَادِ بْنِ عِلاَقَةَ، سَمِعَ جَرِيرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ بَايَعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم عَلَى النُّصْحِ لِكُلِّ مُسْلِمٍ ‏.‏
(Sufyan narrated on the authority of Ziyad b. 'Ilaqa that he heard Jarir b. 'Abdullah saying:I pledged allegiance to the Messenger of Allah may peace and blessings be upon him) on sincerity and well-wishing for every Muslim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।