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सहीह मुस्लिम

नंबर 198

नंबर 198किताब 1, नंबर 105अरबी नंबरिंग 55.03
وَحَدَّثَنِي أُمَيَّةُ بْنُ بِسْطَامَ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ، - يَعْنِي ابْنَ زُرَيْعٍ - حَدَّثَنَا رَوْحٌ، - وَهُوَ ابْنُ الْقَاسِمِ - حَدَّثَنَا سُهَيْلٌ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ، سَمِعَهُ وَهُوَ، يُحَدِّثُ أَبَا صَالِحٍ عَنْ تَمِيمٍ الدَّارِيِّ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِمِثْلِهِ ‏.‏
Umayya b. Bistam narrates the same hadith of the Messenger of Allah (may peace and blessings be upon him) on the authority of Tamim ad-Dari

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।