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सहीह मुस्लिम

नंबर 196

नंबर 196किताब 1, नंबर 103अरबी नंबरिंग 55.01
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ الْمَكِّيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ قُلْتُ لِسُهَيْلٍ إِنَّ عَمْرًا حَدَّثَنَا عَنِ الْقَعْقَاعِ، عَنْ أَبِيكَ، قَالَ وَرَجَوْتُ أَنْ يُسْقِطَ، عَنِّي رَجُلاً قَالَ فَقَالَ سَمِعْتُهُ مِنَ الَّذِي سَمِعَهُ مِنْهُ أَبِي كَانَ صَدِيقًا لَهُ بِالشَّامِ ثُمَّ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ سُهَيْلٍ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ عَنْ تَمِيمٍ الدَّارِيِّ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ الدِّينُ النَّصِيحَةُ ‏"‏ قُلْنَا لِمَنْ قَالَ ‏"‏ لِلَّهِ وَلِكِتَابِهِ وَلِرَسُولِهِ وَلأَئِمَّةِ الْمُسْلِمِينَ وَعَامَّتِهِمْ ‏"‏ ‏.‏
तमीम दारी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "धर्म, शुभचिंतन का नाम है।" हमने कहा : किसका? तो फ़रमाया : "अल्लाह, उसकी किताब, उसके रसूल, मुसलमानों के मार्गदर्शकों और आम लोगों का।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।