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सहीह मुस्लिम

नंबर 191

नंबर 191किताब 1, नंबर 98अरबी नंबरिंग 52.10
وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَلَمْ يَذْكُرْ ‏ "‏ رَأْسُ الْكُفْرِ قِبَلَ الْمَشْرِقِ ‏"‏ ‏.‏
Qutaiba b. Sa'id and Zubair b. Harb say:Jarir narrated this on the authority of A'mash with the same chain of narrators (as mentioned above)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।