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सहीह मुस्लिम

नंबर 162

नंबर 162किताब 1, नंबर 69अरबी नंबरिंग 41
حَدَّثَنَا حَسَنٌ الْحُلْوَانِيُّ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، جَمِيعًا عَنْ أَبِي عَاصِمٍ، - قَالَ عَبْدٌ أَنْبَأَنَا أَبُو عَاصِمٍ، - عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا الزُّبَيْرِ، يَقُولُ سَمِعْتُ جَابِرًا، يَقُولُ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ الْمُسْلِمُ مَنْ سَلِمَ الْمُسْلِمُونَ مِنْ لِسَانِهِ وَيَدِهِ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Jabir that he heard the (Holy Prophet) say:A Muslim is he from whose hand and tongue the Muslims are safe

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।