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सहीह मुस्लिम

नंबर 109

नंबर 109किताब 1, नंबर 17अरबी नंबरिंग 15.02
وَحَدَّثَنِي حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ، وَالْقَاسِمُ بْنُ زَكَرِيَّاءَ، قَالاَ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى، عَنْ شَيْبَانَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، وَأَبِي، سُفْيَانَ عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ النُّعْمَانُ بْنُ قَوْقَلٍ يَا رَسُولَ اللَّهِ ‏.‏ بِمِثْلِهِ ‏.‏ وَزَادَ فِيهِ وَلَمْ أَزِدْ عَلَى ذَلِكَ شَيْئًا ‏.‏
A similar hadith is narrated on Jabir's authority in which the following words are added:I will do nothing more

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।