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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 400

नंबर 400किताब 9, नंबर 75
حَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يُصَلِّي قَبْلَ الظُّهْرِ رَكْعَتَيْنِ وَبَعْدَهَا رَكْعَتَيْنِ وَبَعْدَ الْمَغْرِبِ رَكْعَتَيْنِ فِي بَيْتِهِ وَبَعْدَ صَلاَةِ الْعِشَاءِ رَكْعَتَيْنِ وَكَانَ لاَ يُصَلِّي بَعْدَ الْجُمُعَةِ حَتَّى يَنْصَرِفَ فَيَرْكَعَ رَكْعَتَيْنِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Nafi from Ibn Umar that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, used to pray two rakas before dhuhr and two rakas after it, two rakas after maghrib, in his house, and two rakas after isha. He did not pray after jumua until he had left, and then he prayed two rakas
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Shortening the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।