وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ، قَالَ رَأَيْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ يَقِفُ عَلَى قَبْرِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَيُصَلِّي عَلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَعَلَى أَبِي بَكْرٍ وَعُمَرَ .
Yahya related to me from Malik that Abdullah ibn Dinar said, "I saw Abdullah ibn Umar stop by the grave of the Prophet, may Allah bless him and grant him peace, and ask for blessings on the Prophet, may Allah bless him and grant him peace, and on Abu Bakr and Umar
स्रोत में दर्ज दर्जे
Mauquf SahihSalim al-Hilali
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।