وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى الْمَازِنِيِّ، عَنْ أَبِي الْحُبَابِ، سَعِيدِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّهُ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي وَهُوَ عَلَى حِمَارٍ وَهُوَ مُتَوَجِّهٌ إِلَى خَيْبَرَ .
Yahya related to me from Malik from Amr ibn Yahya al-Mazini from Abu'l-Hubab Said ibn Yasar that Abdullah ibn Umar said, "I saw the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, praying on a donkey while heading towards Khaybar
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihSalim al-Hilali
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।