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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 351

नंबर 351किताब 9, नंबर 26
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ، وَعُرْوَةَ بْنَ الزُّبَيْرِ، وَأَبَا، بَكْرِ بْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ كَانُوا يَتَنَفَّلُونَ فِي السَّفَرِ ‏.‏ قَالَ يَحْيَى وَسُئِلَ مَالِكٌ عَنِ النَّافِلَةِ فِي السَّفَرِ فَقَالَ لاَ بَأْسَ بِذَلِكَ بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَقَدْ بَلَغَنِي أَنَّ بَعْضَ أَهْلِ الْعِلْمِ كَانَ يَفْعَلُ ذَلِكَ ‏.‏
Yahya related to me from Malik that he had heard that al-Qasim ibn Muhammad and Urwa ibn az-Zubayr and Abu Bakr ibn Abd ar Rahman used to pray nawafil when travelling. Yahya said that Malik was asked about voluntary prayers when travelling and he said, "There is no harm in them, either at night or during the day. I have heard that some of the people of knowledge used to do that
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Shortening the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।