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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 332

नंबर 332किताब 9, नंबर 7
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ بَلَغَهُ عَنْ عَلِيِّ بْنِ حُسَيْنٍ، أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا أَرَادَ أَنْ يَسِيرَ يَوْمَهُ جَمَعَ بَيْنَ الظُّهْرِ وَالْعَصْرِ وَإِذَا أَرَادَ أَنْ يَسِيرَ لَيْلَهُ جَمَعَ بَيْنَ الْمَغْرِبِ وَالْعِشَاءِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik that he had heard that AIi ibn Husain used to say, "The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, would join dhuhr and asr if he wished to travel the same day, and he would join maghrib and isha if he wished to travel the same night
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Shortening the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।