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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 331

नंबर 331किताब 9, नंबर 6
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَنَّهُ سَأَلَ سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ هَلْ يُجْمَعُ بَيْنَ الظُّهْرِ وَالْعَصْرِ فِي السَّفَرِ فَقَالَ نَعَمْ لاَ بَأْسَ بِذَلِكَ أَلَمْ تَرَ إِلَى صَلاَةِ النَّاسِ بِعَرَفَةَ
Yahya related to me from Malik from Ibn Shihab that he had asked Salim ibn Abdullah, "Can you join dhuhr and asr when travelling?" He said, "Yes, there is no harm in that. Haven't you seen the people pray on Arafa?
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Shortening the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।