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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1829

नंबर 1829किताब 56, नंबर 19
وَحَدَّثَنِي مَالِكٌ، عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ، أَنَّهُ قَالَ قِيلَ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَيَكُونُ الْمُؤْمِنُ جَبَانًا فَقَالَ ‏"‏ نَعَمْ ‏"‏ ‏.‏ فَقِيلَ لَهُ أَيَكُونُ الْمُؤْمِنُ بَخِيلاً فَقَالَ ‏"‏ نَعَمْ ‏"‏ ‏.‏ فَقِيلَ لَهُ أَيَكُونُ الْمُؤْمِنُ كَذَّابًا فَقَالَ ‏"‏ لاَ ‏"‏ ‏.‏
Malik related to me that Safwan ibn Sulaym said, "The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, was asked, 'Can the mumin be a coward?' He said, 'Yes.' He was asked, 'Can the mumin be a miser?' He said, 'Yes.' He was asked, 'Can the mumin be a liar?' He said, 'No
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Speech

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।