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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1828

नंबर 1828किताब 56, नंबर 18
وَحَدَّثَنِي مَالِكٌ، أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ مَسْعُودٍ، كَانَ يَقُولُ لاَ يَزَالُ الْعَبْدُ يَكْذِبُ وَتُنْكَتُ فِي قَلْبِهِ نُكْتَةٌ سَوْدَاءُ حَتَّى يَسْوَدَّ قَلْبُهُ كُلُّهُ فَيُكْتَبَ عِنْدَ اللَّهِ مِنَ الْكَاذِبِينَ ‏.‏
Malik related to me that he heard that Abdullah ibn Masud used to say, "The slave continues to lie and a black spot grows in his heart until all his heart becomes black. Then he is written, in Allah's sight, among the liars
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Speech

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।