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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1607

नंबर 1607किताब 45, नंबर 10
حَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ عَمْرٍو، مَوْلَى الْمُطَّلِبِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم طَلَعَ لَهُ أُحُدٌ فَقَالَ ‏ "‏ هَذَا جَبَلٌ يُحِبُّنَا وَنُحِبُّهُ اللَّهُمَّ إِنَّ إِبْرَاهِيمَ حَرَّمَ مَكَّةَ وَأَنَا أُحَرِّمُ مَا بَيْنَ لاَبَتَيْهَا ‏"‏ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Amr, the mawla of al-Muttalib from Anas ibn Malik that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, saw Uhud and said, "This is a mountain which loves us and we love it. O Allah! Ibrahim made Makka Haram, and I will make what is between the two tracts of black stones (in Madina) a Haram
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · Madina

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।