सीधे कंटेंट पर जाएँ
मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1606

नंबर 1606किताब 45, नंबर 9
وَحَدَّثَنِي مَالِكٌ، أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ عُمَرَ بْنَ عَبْدِ الْعَزِيزِ، حِينَ خَرَجَ مِنَ الْمَدِينَةِ الْتَفَتَ إِلَيْهَا فَبَكَى ثُمَّ قَالَ يَا مُزَاحِمُ أَتَخْشَى أَنْ نَكُونَ مِمَّنْ نَفَتِ الْمَدِينَةُ
Malik related to me that he had heard that when Umar ibn Abd al- Aziz left Madina, he turned towards it and wept. Then he said, "O Muzahim! Do you fear that we might be among those that Madina casts off?
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · Madina

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।