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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 190

नंबर 190किताब 3, नंबर 23
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ رُومَانَ، أَنَّ نَافِعَ بْنَ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ، كَانَ يَقْرَأُ خَلْفَ الإِمَامِ فِيمَا لاَ يَجْهَرُ فِيهِ بِالْقِرَاءَةِ ‏.‏ قَالَ مَالِكٌ وَذَلِكَ أَحَبُّ مَا سَمِعْتُ إِلَىَّ فِي ذَلِكَ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Yazid ibn Ruman that Nafi ibn Jubayr ibn Mutim used to recite behind the imam when hedid not recite aloud . Malik said, "That is the most preferable to me of what I have heard about the matter
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।