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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 189

नंबर 189किताब 3, नंबर 22
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، وَعَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَنَّ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ، كَانَ يَقْرَأُ خَلْفَ الإِمَامِ فِيمَا لاَ يَجْهَرُ فِيهِ الإِمَامُ بِالْقِرَاءَةِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Yahya ibn Said and from Rabia ibn Abi Abd ar Rahman that al-Qasim ibn Muhammad used to recite behind the imam when the imam did not recite aloud
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।