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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 885

नंबर 885किताब 20, नंबर 181
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ حَفْصَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ، أَنَّهَا قَالَتْ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مَا شَأْنُ النَّاسِ حَلُّوا وَلَمْ تَحْلِلْ أَنْتَ مِنْ عُمْرَتِكَ فَقَالَ ‏ "‏ إِنِّي لَبَّدْتُ رَأْسِي وَقَلَّدْتُ هَدْيِي فَلاَ أَحِلُّ حَتَّى أَنْحَرَ ‏"‏ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Nafi from Abdullah ibn Umar that Hafsa, umm al-muminin, once said to the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, "Why is it that everyone has left ihram and you still have not left ihram from your umra?" and he replied, "I have matted my hair and garlanded my sacrificial animal and will not leave ihram until I have sacrificed the animal
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।