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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 879

नंबर 879किताब 20, नंबर 175
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ طَلْحَةَ بْنَ عُبَيْدِ اللَّهِ، كَانَ يُقَدِّمُ نِسَاءَهُ وَصِبْيَانَهُ مِنَ الْمُزْدَلِفَةِ إِلَى مِنًى ‏.‏ وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ أَنَّهُ سَمِعَ بَعْضَ أَهْلِ الْعِلْمِ يَكْرَهُ رَمْىَ الْجَمْرَةِ حَتَّى يَطْلُعَ الْفَجْرُ مِنْ يَوْمِ النَّحْرِ وَمَنْ رَمَى فَقَدْ حَلَّ لَهُ النَّحْرُ ‏.‏
Yahya related to me from Malik that he had heard that Talha ibn Ubaydullah used to send his family and children from Muzdalifa to Mina ahead of him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।