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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 858

नंबर 858किताब 20, नंबर 154
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّهُ قَالَ مَنْ أَهْدَى بَدَنَةً ثُمَّ ضَلَّتْ أَوْ مَاتَتْ فَإِنَّهَا إِنْ كَانَتْ نَذْرًا أَبْدَلَهَا وَإِنْ كَانَتْ تَطَوُّعًا فَإِنْ شَاءَ أَبْدَلَهَا وَإِنْ شَاءَ تَرَكَهَا ‏.‏ وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ أَنَّهُ سَمِعَ أَهْلَ الْعِلْمِ يَقُولُونَ لاَ يَأْكُلُ صَاحِبُ الْهَدْىِ مِنَ الْجَزَاءِ وَالنُّسُكِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Nafi that Abdullah ibn Umar said, "If someone dedicates an animal and then it goes astray or dies, he should provide a substitute, if it was for a vow. If, however, it was voluntary, then he can either provide a substitute for it or not, as he wishes
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।