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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 857

नंबर 857किताब 20, नंबर 153
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَنَّهُ قَالَ مَنْ أَهْدَى بَدَنَةً جَزَاءً أَوْ نَذْرًا أَوْ هَدْىَ تَمَتُّعٍ فَأُصِيبَتْ فِي الطَّرِيقِ فَعَلَيْهِ الْبَدَلُ ‏.‏
Yahya related to me from Malik that Ibn Shihab said, "If someone dedicates an animal as compensation, or for a vow, or as the sacrifice for tamattu, and misfortune befalls it on the road, he must provide a substitute
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।