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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 777

नंबर 777किताब 20, नंबर 73
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ لاَ يَحْتَجِمُ الْمُحْرِمُ إِلاَّ مِمَّا لاَ بُدَّ لَهُ مِنْهُ ‏.‏ قَالَ مَالِكٌ لاَ يَحْتَجِمُ الْمُحْرِمُ إِلاَّ مِنْ ضَرُورَةٍ ‏.‏
Yahya related to me from Malik, from Nafi, that Abdullah ibn Umar used to say, "Someone in ihram should not be cupped, except when there is no other alternative." Malik said, "Someone who is in ihram should not be cupped except when it is necessary
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।