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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 507

नंबर 507किताब 15, नंबर 38
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، أَنَّ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ، كَانَ يَقُولُ إِنَّ الرَّجُلَ لَيُرْفَعُ بِدُعَاءِ وَلَدِهِ مِنْ بَعْدِهِ وَقَالَ بِيَدَيْهِ نَحْوَ السَّمَاءِ فَرَفَعَهُمَا ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Yahya ibn Said that Said ibn al-Musayyab used to say, "A man is raised by the dua of his son after his death." He spoke with his hands turned upwards, and then lifted them up
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।