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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 462

नंबर 462किताब 14, नंबर 8
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، قَالَ مَا بَيْنَ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ قِبْلَةٌ إِذَا تُوُجِّهَ قِبَلَ الْبَيْتِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Nafi that Umar ibn al-Khattab said, "Any direction that is between east and west can be taken as a qibla if the person praying is face-on to the House
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Qibla

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।