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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 461

नंबर 461किताब 14, नंबर 7
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، أَنَّهُ قَالَ صَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بَعْدَ أَنْ قَدِمَ الْمَدِينَةَ سِتَّةَ عَشَرَ شَهْرًا نَحْوَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ ثُمَّ حُوِّلَتِ الْقِبْلَةُ قَبْلَ بَدْرٍ بِشَهْرَيْنِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Yahya ibn Said that Said ibn al-Musayyab said, "The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, prayed towards the Baytal-Maqdis for sixteen months after arriving in Madina. Then the qibla was moved, two months before the battle of Badr
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Qibla

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।