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सुनन इब्न माजा

नंबर 1788

नंबर 1788किताब 8, नंबर 6
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ، حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ أَعْيَنَ، حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ الْحَارِثِ، عَنْ دَرَّاجٍ أَبِي السَّمْحِ، عَنِ ابْنِ حُجَيْرَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ إِذَا أَدَّيْتَ زَكَاةَ مَالِكَ فَقَدْ قَضَيْتَ مَا عَلَيْكَ ‏"‏ ‏.‏
Abu Hurairah narrated that:the Messenger of Allah said: “When you pay Zakat on your wealth, then you have done what is required to you.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · The Chapters Regarding Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।