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सुनन इब्न माजा

नंबर 1695

नंबर 1695किताब 7, नंबर 58
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ، عَنْ عَاصِمٍ، عَنْ زِرٍّ، عَنْ حُذَيْفَةَ، قَالَ: تَسَحَّرْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ هُوَ النَّهَارُ إِلاَّ أَنَّ الشَّمْسَ لَمْ تَطْلُعْ ‏.[ قالَ ابُو إسحاق: حديث حُذَيْفَةَ مَنْسوخٌ لَيْسَ بشَيْء.]‏
It was narrated that Hudhaifah said:“I ate Suhur with the Messenger of Allah (ﷺ) when it was daybreak but the sun had not yet risen.” [(One of the narrators) Abu Ishaq said: “The Hadith of Hudhaifah is abrogated and does not mean anything.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।