حَدَّثَنَا مُجَاهِدُ بْنُ مُوسَى، حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ بْنُ مَالِكٍ الْمُزَنِيُّ، حَدَّثَنَا الْجُرَيْرِيُّ، عَنْ أَبِي نَضْرَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: مَا صُمْنَا عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ تِسْعًا وَعِشْرِينَ أَكْثَرُ مِمَّا صُمْنَا ثَلاَثِينَ .
It was narrated that Abu Hurairah said:"(The months in which) We fasted twenty-nine days at the time of the Messenger of Allah (ﷺ), were more than (the months in which) we fasted thirty days
स्रोत में दर्ज दर्जे
Hasan SahihAl-Albani
Hasan SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।