حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ بْنِ سَمُرَةَ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْحَسَنِ، حَدَّثَنَا أَبُو شَيْبَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ لَمَّا قُبِضَ إِبْرَاهِيمُ ابْنُ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ لَهُمُ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " لاَ تُدْرِجُوهُ فِي أَكْفَانِهِ حَتَّى أَنْظُرَ إِلَيْهِ " . فَأَتَاهُ فَانْكَبَّ عَلَيْهِ وَبَكَى .
It was narrated that Anas bin Malik said:“When Ibrahim the son of the Prophet (ﷺ) died, the Prophet (ﷺ) said to them: ‘Do not wrap him in his shroud until I look at him.’ He came to him, bent over and wept.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
DaifShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।