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सुनन इब्न माजा

नंबर 973

नंबर 973किताब 5, नंबर 171
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي الشَّوَارِبِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ، حَدَّثَنَا عَاصِمٌ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ بِتُّ عِنْدَ خَالَتِي مَيْمُونَةَ فَقَامَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يُصَلِّي مِنَ اللَّيْلِ فَقُمْتُ عَنْ يَسَارِهِ فَأَخَذَ بِيَدِي فَأَقَامَنِي عَنْ يَمِينِهِ ‏.‏
It was narrated that Ibn ‘Abbas said:“I stayed overnight with my maternal aunt Maimunah, and the Prophet (ﷺ) got up during the night to perform prayer. So I got up and stood on his left. He took me by the hand and made me stand on his right.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।