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सुनन इब्न माजा

नंबर 897

नंबर 897किताब 5, नंबर 95
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، حَدَّثَنَا الْعَلاَءُ بْنُ الْمُسَيَّبِ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ، عَنْ طَلْحَةَ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ حُذَيْفَةَ، ح وَحَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ، عَنِ الْمُسْتَوْرِدِ بْنِ الأَحْنَفِ، عَنْ صِلَةَ بْنِ زُفَرَ، عَنْ حُذَيْفَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ يَقُولُ بَيْنَ السَّجْدَتَيْنِ ‏ "‏ رَبِّ اغْفِرْ لِي، رَبِّ اغْفِرْ لِي ‏"‏ ‏.‏
हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो सजदों के बीच यह दुआ पढ़ा करते थे : "رَبِّ اغْفِرْ لِي، رَبِّ اغْفِرْ لِي" (ऐ मेरे रब! मुझे क्षमा कर दे। ऐ मेरे रब! मुझे क्षमा कर दे।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।