حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا عَبَّادُ بْنُ رَاشِدٍ، عَنِ الْحَسَنِ، حَدَّثَنَا أَحْمَرُ، صَاحِبُ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ إِنْ كُنَّا لَنَأْوِي لِرَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ مِمَّا يُجَافِي بِيَدَيْهِ عَنْ جَنْبَيْهِ إِذَا سَجَدَ .
Ahmar, the Companion of the Messenger of Allah (ﷺ), narrated to us:“We used to feel sorry for the Messenger of Allah (ﷺ) because he took pains to keep his arms away from his sides when he prostrated.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
Hasan SahihAl-Albani
Hasan SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
Isnaad HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।