حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ يُوسُفَ الْفِرْيَابِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ عَطَاءٍ، حَدَّثَنَا طَلْحَةُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ رَاشِدٍ، قَالَ سَمِعْتُ وَابِصَةَ بْنَ مَعْبَدٍ، يَقُولُ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يُصَلِّي فَكَانَ إِذَا رَكَعَ سَوَّى ظَهْرَهُ حَتَّى لَوْ صُبَّ عَلَيْهِ الْمَاءُ لاَسْتَقَرَّ .
It was narrated that Rashid said:“I heard Wabisah bin Ma’bad saying: ‘I saw the Messenger of Allah (ﷺ) performing prayer, and when he bowed he made his back so straight that if water were poured on it, it would have stayed there.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Very DaifShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।