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सुनन इब्न माजा

नंबर 849

नंबर 849किताब 5, नंबर 47
حَدَّثَنَا جَمِيلُ بْنُ الْحَسَنِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى، حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنِ ابْنِ أُكَيْمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ صَلَّى بِنَا رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَذَكَرَ نَحْوَهُ وَزَادَ فِيهِ قَالَ فَسَكَتُوا بَعْدُ فِيمَا جَهَرَ فِيهِ الإِمَامُ ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah said:“The Messenger of Allah (ﷺ) led us in prayer,” and he mentioned a similar report, and added to it, and he said: “And after that they were quiet in the prayers in which the Imam recites aloud.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।