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सुनन इब्न माजा

नंबर 848

नंबर 848किताब 5, नंबर 46
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَهِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنِ ابْنِ أُكَيْمَةَ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ صَلَّى النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ بِأَصْحَابِهِ صَلاَةً نَظُنُّ أَنَّهَا الصُّبْحُ فَقَالَ ‏"‏ هَلْ قَرَأَ مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ رَجُلٌ أَنَا ‏.‏ قَالَ ‏"‏ إِنِّي أَقُولُ مَا لِي أُنَازَعُ الْقُرْآنَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn Ukaimah said:“I heard Abu Hurairah say: ‘The Prophet (ﷺ) led his Companions in a prayer; we think it was the Subh. He said: “Did anyone among you recite?” A man said: “I did.” He said: “I was saying to myself, what is wrong with me that someone is fighting to wrest the Qur’an from me?”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।