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सुनन इब्न माजा

नंबर 814

नंबर 814किताब 5, नंबर 12
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، وَبَكْرُ بْنُ خَلَفٍ، وَعُقْبَةُ بْنُ مُكْرَمٍ، قَالُوا حَدَّثَنَا صَفْوَانُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ رَافِعٍ، عَنْ أَبِي عَبْدِ اللَّهِ ابْنِ عَمِّ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ يَفْتَتِحُ الْقِرَاءَةَ بِـ ‏{الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ}‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that the Prophet (ﷺ) used to start his recitation with ‘All the praises and thanks are to Allah, the Lord of all that exists’ (Al-hamdu Lillahi Rabbil-‘Alamin),’ [1:]
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • Sahih LighairihiMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।