حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، ح وَحَدَّثَنَا جُبَارَةُ بْنُ الْمُغَلِّسِ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ وَأَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ يَفْتَتِحُونَ الْقِرَاءَةَ بِـ {الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ}
It was narrated that Anas bin Malik said:“The Messenger of Allah (ﷺ), Abu Bakr and ‘Umar used to start their recitation with ‘All the praises and thanks are to Allah, the Lord of all that exists (Al-hamdu Lillahi Rabbil-‘Alamin).” [1:]
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।