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सुनन इब्न माजा

नंबर 1381

नंबर 1381किताब 5, नंबर 579
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا شَبَابَةُ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ يَزِيدَ الرِّشْكِ، عَنْ مُعَاذَةَ الْعَدَوِيَّةِ، قَالَتْ سَأَلْتُ عَائِشَةَ أَكَانَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يُصَلِّي الضُّحَى قَالَتْ نَعَمْ أَرْبَعًا وَيَزِيدُ مَا شَاءَ اللَّهُ ‏.‏
Mu’adhah Al-‘Adawiyyah said:“I asked ‘Aishah: ‘Did the Prophet (ﷺ) pray Duha?’ She said: ‘Yes; four (Rak’ah) and he would add whatever Allah willed.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।