حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالاَ حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ بُكَيْرٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَاقَ، عَنْ مُوسَى بْنِ أَنَسٍ، عَنْ ثُمَامَةَ بْنِ أَنَسٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَقُولُ " مَنْ صَلَّى الضُّحَى ثِنْتَىْ عَشْرَةَ رَكْعَةً بَنَى اللَّهُ لَهُ قَصْرًا مِنْ ذَهَبٍ فِي الْجَنَّةِ " .
It was narrated that Anas bin Malik said:“I heard the Messenger of Allah (ﷺ) say: ‘Whoever prays Duha with twelve Rak’ah, Allah will build for him a palace of gold in Paradise.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifAl-Albani
DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
DaifShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।