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सुनन इब्न माजा

नंबर 1373

नंबर 1373किताब 5, नंबर 571
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ، حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ الْوَلِيدِ الْمَدِينِيُّ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ مَنْ صَلَّى بَيْنَ الْمَغْرِبِ وَالْعِشَاءِ عِشْرِينَ رَكْعَةً بَنَى اللَّهُ لَهُ بَيْتًا فِي الْجَنَّةِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that ‘Aishah said:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: ‘Whoever prays twenty Rak’ah between Maghrib and ‘Isha’, Allah will build for him a house in Paradise.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • MawduAl-Albani
  • MawduMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • MawduShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।