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सुनन इब्न माजा

नंबर 1352

नंबर 1352किताब 5, नंबर 550
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ هَاشِمٍ، عَنِ ابْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنْ أَبِي لَيْلَى، قَالَ صَلَّيْتُ إِلَى جَنْبِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ وَهُوَ يُصَلِّي مِنَ اللَّيْلِ تَطَوُّعًا فَمَرَّ بِآيَةِ عَذَابٍ فَقَالَ ‏ "‏ أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ النَّارِ وَوَيْلٌ لأَهْلِ النَّارِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Laila said:“I prayed beside the Prophet (ﷺ) when he was praying voluntary prayers at night. He recited a Verse which mentioned punishment and said: ‘I seek refuge with Allah from the Fire, woe to the people of the Fire.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।