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सुनन इब्न माजा

नंबर 1351

नंबर 1351किताब 5, नंबर 549
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ، عَنِ الْمُسْتَوْرِدِ بْنِ الأَحْنَفِ، عَنْ صِلَةَ بْنِ زُفَرَ، عَنْ حُذَيْفَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ صَلَّى فَكَانَ إِذَا مَرَّ بِآيَةِ رَحْمَةٍ سَأَلَ وَإِذَا مَرَّ بِآيَةِ عَذَابٍ اسْتَجَارَ وَإِذَا مَرَّ بِآيَةٍ فِيهَا تَنْزِيهٌ لِلَّهِ سَبَّحَ ‏.‏
It was narrated from Hudhaifah that the Prophet (ﷺ) prayed, and when he recited a Verse which mentioned mercy, he would ask for mercy; when he recited a Verse that mentioned punishment he would pray for deliverance from it; and when he recited a Verse that mentioned the Tanzih of Allah, he would glorify Him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।