حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ خَلاَّدٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ يَعْلَى بْنِ عَطَاءٍ، أَنَّهُ سَمِعَ عَلِيًّا الأَزْدِيَّ، يُحَدِّثُ أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ عُمَرَ، يُحَدِّثُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ أَنَّهُ قَالَ " صَلاَةُ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ مَثْنَى مَثْنَى " .
Ibn ‘Umar narrated that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Prayers at night and during the day are to be offered two by two.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।