सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 1312

नंबर 1312किताब 5, नंबर 510
حَدَّثَنَا جُبَارَةُ بْنُ الْمُغَلِّسِ، حَدَّثَنَا مِنْدَلُ بْنُ عَلِيٍّ، عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ اجْتَمَعَ عِيدَانِ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَصَلَّى بِالنَّاسِ ثُمَّ قَالَ ‏ "‏ مَنْ شَاءَ أَنْ يَأْتِيَ الْجُمُعَةَ فَلْيَأْتِهَا وَمَنْ شَاءَ أَنْ يَتَخَلَّفَ فَلْيَتَخَلَّفْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn ‘Umar said:“Two ‘Eid came together at the time of the Messenger of Allah (ﷺ), so he led the people in prayer, then he said: ‘Whoever wishes to come to Friday (prayer), let him come, and whoever wishes to stay behind, let him stay behind.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • Sahih LighairihiMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।